Saturday, 26 May 2018

Aaj k political system

Aaj kal ka political system aisa hai ki jo Todays plitical system or Aaj ki Rajnitikehte hain Karte Nahi .Aur Jo karte hain Woh Kehte nahi.
Agar koi kahta hai ki I LOVE CHIKEN .
 To iska MATLAB ye nahi ki janab sakahari hain aur wo chicken se bahut pyar karate hain.Matlab unhe khane me chicken bahut pasand hai.
Usi tarah koi politician Agar khata hai ki waha Hindu warg ka hitsisi hai to samajh jaiye ki wah Hindu vote ki rajniti kar raha hai
Usi tarah koi politician Agar khata hai ki waha Muslim warg ka hitsisi hai to samajh jaiye ki wah Muslim  vote ki rajniti kar raha hai





Saturday, 24 March 2018

malik/ Naukar

                                             



मेरे कहानी का शीर्षक आप को अटपटा लग सकता है , किन्तु जब आप पूरी कहानी पढ़ेंगे तो आप को भी लगेगा की मैंने शीर्षक  के साथ न्याय किया है / नोयडा से कुछ दूर एक गाँव था ,कहने को तो यह गाँव नोएडा  दिल्ली जैसे बड़े शहरों  से ज्यादा दूर न था पर ऐसा  लगता था की आज़ादी के  इतने सालों बाद भी यह गाँव विकास से अनछुआ रह गया है , जमीन का ज्यादा हिस्सा बंजर या कम उपजाऊ था / अमीर या तो और  अमीर हो रहे थे और गाँव का अधिकांश हिस्सा गरीबी में  किसी तरह दिन गुजारने को मजबूर था खैर समय को किसी से क्या वो तो अपनी रफ़्तार से ही चल रहा था /नोएडा का जब विस्तारीकरण हो रहा था तो इस गांव की भी किस्मत पलटी,जिनके पास थोडी जमीन थी  उनको भी अच्छा मुआवजा मिला /
अब बात करते हैं अपने राम भरोसे की जैसा नाम वैसा ही व्यक्तित्व ,राम भरोसे को भगवान अच्छी  कद काठी देना भले हे भूल गया हो पर बुद्धि देने में कोई कंजूसी न की थी /माँ बाप तो बहुत साल पहले हे भगवान  को प्यारे हो गए थे,उनके  चाचा ने आसरा दिया और काम भी अपने छोटे से चाय समोसे की दुकान पे उसे रखा था \ जैसे सभी को मुआवजा मिला चाचा ने भी रामभरोसे के हिस्से के पैसे उसको दे दिए हालांकि चाची  के रामभरोसे को मिलने वाले पैसे को लेकर विचार कुछ और ही  थे / पैसा ऐसी चीज़ है अगर हो तो बेवक़ूफ़ को भी दुनिया की नज़र में चालाक और न हो तो  आप लोग जानते ही  हैं / रामभरोसे ने निश्चय किया की वो इन पैसो से व्यापार करेगा ,उसने चाचा से आज्ञा ली और दिल्ली की राह पकड़ी ।उसके गाँव के कई लोग दिल्ली में रह कर नौकरी करते थे इसलिए उसे रहने की समस्या का सामना नहीं करना पड़ा उन्ही की मदद से उसने एक छोटी सी दूकान किराये पे ले ली ,चाचा के साथ वर्षों का चाय और समोसे बनाने का अनुभव उसके काम आया ।
धंधा चल निकला अच्छे चाय समोसे किफायती कीमत पर सभी को भा रहे थे। रामभरोसे के लिए अब अकेले सम्भालना बस के बाहर था। एक और आदमी की सख्त जरूरत समझ में आ रही थी। इसके लिए उसके पास सबसे बढ़िया विकल्प मंगल समझ में आया।
 मंगल उसके पास के गांव का रहने वाला था, वह लम्बी कद काठी का सुन्दर और काफी पढ़ा लिखा नौजवान था और रोजगार के लिए शहर आया था।
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